रेशमविकास विभाग और REAP परियोजना की अनूठी पहल: गरुड़ ब्लॉक के थान डंगोली और दुदिला में हुआ सघन निरीक्षण व संवाद
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| निरीक्षण के दौरान |
बागेश्वर: विकास खंड गरुड़ के अंतर्गत ग्राम पंचायत थान डंगोली और ग्राम पंचायत दुदिला में रेशम विकास विभाग एवं ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष निरीक्षण एवं सामुदायिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में चलाई जा रही आजीविका गतिविधियों की जमीनी हकीकत का जायजा लेना और किसानों को सशक्त बनाना था।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य
इस संयुक्त भ्रमण और संवाद का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर संचालित विकासात्मक गतिविधियों का प्रत्यक्ष अवलोकन करना, वित्तीय सहायता के पारदर्शी उपयोग की समीक्षा करना और ग्रामीण आजीविका पर इसके प्रभावों का सटीक मूल्यांकन करना था।![]() |
| जायजा लेते हुए |
विशेष नेतृत्व और निरीक्षण के प्रमुख बिंदु
यह पूरा निरीक्षण अभियान ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के माननीय सलाहकार श्री अविनाश सुभाषराव भोंसले जी के कुशल एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस दौरान निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया:जमीनी अवलोकन: रेशम कीट पालन इकाइयों और शहतूत (Mulberry) वृक्षारोपण की वर्तमान स्थिति की बारीकी से जाँच की गई।
समीक्षा: REAP परियोजना द्वारा प्रदान किए गए वित्तीय सहयोग और तकनीकी सहायता की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया।
सीधा संवाद: रेशम उत्पादक कृषकों के साथ खुलकर बातचीत की गई, जिसमें उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और सुझावों को प्रमुखता से सुना गया।
कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति
इस निरीक्षण और संवाद कार्यक्रम में शासन-प्रशासन और परियोजना से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे:श्री अविनाश सुभाषराव भोंसले – सलाहकार, ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना, श्रीमती स्नेहा जोशी कर्नाटक – सुपरवाइजर, रेशम विकास विभाग, श्री ब्रजेश रतूड़ी – रेशम निरीक्षक
, श्री तारा प्रसाद – मूल्यांकन एवं अनुश्रवण वित्त सहायक (REAP, वि.खं. गरुड़), श्री महेन्द्र सिंह नेगी – आजीविका समन्वयक (REAP, वि.खं. गरुड़)
इसके साथ ही बड़ी संख्या में स्थानीय रेशम उत्पादक कृषक एवं सामुदायिक हितधारक भी इस दौरान उपस्थित रहे।
सलाहकार महोदय के निर्देश और मुख्य निष्कर्ष
निरीक्षण के उपरांत सलाहकार श्री अविनाश सुभाषराव भोंसले जी ने किसानों के कठिन परिश्रम और उनके प्रयासों की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने कृषकों को रेशम उत्पादन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आजीविका को और अधिक सुदृढ़ एवं लाभकारी बनाने के लिए प्रेरित किया।
इसके साथ ही, उन्होंने रेशम विकास विभाग और REAP टीम को आपसी समन्वय और तालमेल को और बेहतर बनाने के कड़े निर्देश दिए, ताकि क्षेत्र के किसानों को समय पर सभी आवश्यक तकनीकी सहायता और सामग्री उपलब्ध कराई जा सके। यह संयुक्त पहल पर्वतीय क्षेत्रों में रेशम उद्योग को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।


