सफलता की कहानी: बागेश्वर की महिलाओं ने सुई-धागे से गढ़ी स्वावलंबन की नई इबारत
बागेश्वर: विकासखंड बागेश्वर के अंतर्गत ऊर्जा क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) से जुड़ी माँ भगवती स्वयं सहायता समूह (अनरसा) की महिलाओं ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से साबित कर दिया है कि अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी उद्यमी बनकर बड़ा बदलाव ला सकती हैं। ग्रामोत्थान रीप (REAP) परियोजना के सहयोग से इन महिलाओं ने आजीविका का एक नया और प्रेरणादायक अध्याय लिखा है।
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| तिरंगा झंडा पैकिंग करती हुई |
ऐसे शुरू हुआ स्वावलंबन का सफर
वित्तीय वर्ष 2025-26 में समूह से जुड़ी 10 उत्साही महिलाओं ने रीप परियोजना के तहत सीबीओ (CBO) स्तर पर एक सिलाई इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था। परियोजना की ओर से महिलाओं को आवश्यक मशीनें, कच्चा माल और विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया, जिसके बाद अगस्त 2026 में इस इकाई का औपचारिक शुभारंभ किया गया।इस सिलाई केंद्र पर महिलाएं न केवल नियमित रूप से कपड़े सिल रही हैं, बल्कि राष्ट्रीय पर्वों और त्योहारों के समय विशेष उत्पादों का निर्माण कर अपनी आय को और बढ़ा रही हैं।
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| राखी तैयार करते हुए |
त्योहारों और राष्ट्रीय पर्वों पर छाईं महिला-निर्मित वस्तुएं
इस इकाई की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन करने की क्षमता है:राष्ट्रीय पर्व: स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के अवसर पर महिलाओं द्वारा तैयार किए गए तिरंगे झंडों की स्थानीय बाजार में भारी मांग रही।
त्योहार: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर महिलाओं द्वारा बनाई गई पारंपरिक और आकर्षक राखियों ने बाजार में धूम मचाई और इन्हें हाथों-हाथ खरीदा गया।
बदलाव के शानदार परिणाम
इस पहल ने समूह की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक और क्रांतिकारी बदलाव किए हैं:आर्थिक मजबूती: प्रत्येक महिला इस इकाई के माध्यम से प्रतिमाह ₹3,000 से ₹4,000 तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर रही है।
आत्मविश्वास में वृद्धि: घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज एक सफल उद्यमी के रूप में पूरे सम्मान के साथ कार्य कर रही हैं।
ग्रामीणों को सुविधा: अब स्थानीय स्तर पर ही कपड़े सिलने और त्योहारी सामग्री उपलब्ध होने से ग्रामीणों को भी बड़ी राहत मिली है।
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| महिला समूह |
अध्यक्षा के बोल
समूह की अध्यक्षा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा,"ग्रामोत्थान रीप परियोजना से मिला सहयोग हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आज हम अपने पैरों पर पूरी तरह खड़ी हैं और अपने बच्चों को एक बेहतर भविष्य देने में सक्षम हो पा रही हैं।"




