बहादुरी की मिसाल: किश्तवाड़ में आतंकवादियों से लोहा लेने वाले हवलदार गजेंद्र सिंह को मरणोपरांत 'कीर्ति चक्र' से सम्मानित किया जाएगा
Havildar Gajendra Singh Gariya Kirti Chakra
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| शहीद गजेन्द्र सिंह गढ़िया |
भारतीय सेना के पराक्रमी और जांबाज सपूत, पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल) की दूसरी बटालियन के हवलदार गजेंद्र सिंह को उनके अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार 'कीर्ति चक्र' (मरणोपरांत) से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। यह प्रभावी पुरस्कार 18 जनवरी 2026 से प्रभावी है।
ऑपरेशन का विवरण: किश्तवाड़ के जंगलों में मुठभेड़
हवलदार गजेंद्र सिंह इन्टेलिजेन्स ट्रूप हवलदार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने किश्तवाड़ जिले के एक विशिष्ट जंगल क्षेत्र पर लगातार नजर रखते हुए वहां आतंकवादियों के मुख्य ठिकाने की पुष्टि की थी। 18 जनवरी 2026 को, किश्तवाड़ के घने जंगलों में 3000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर सर्च टीम का नेतृत्व करते हुए उन्होंने एक खड़ी चट्टान के पास संदिग्ध ठिकाने का पता लगाया। खतरे भांपते हुए वे सावधानी से आगे बढ़े और बेहद नजदीक से आतंकवादियों की मौजूदगी का पता लगाया। उनकी चुनौती से बौखलाए आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें हमारे दोनों स्काउट घायल हो गए।अद्वितीय साहस और सर्वोच्च बलिदान
भारी गोलाबारी के बीच हवलदार गजेंद्र सिंह ने बिना अपनी जान की परवाह किए अनुकरणीय वीरता का परिचय दिया: उन्होंने सबसे पहले गंभीर रूप से घायल पहले स्काउट को सुरक्षित बाहर निकाला और उसे जीवनरक्षक प्राथमिक उपचार दिया। अपनी जान की परवाह न करते हुए उन्होंने दूसरे घायल साथी को भी सुरक्षित निकालने का प्रयास किया, इसी दौरान उन्हें कई गोलियां लगीं।दोनों साथियों को सुरक्षित क्षेत्र में पहुँचाने के बाद, अत्यधिक रक्तस्राव के बावजूद उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया और आतंकवादियों पर फिर से हमला बोल दिया। इस दौरान उन्होंने एक कुख्यात वांटेड विदेशी आतंकवादी को गंभीर रूप से घायल कर दिया।देश के लिए कर्तव्य पथ पर अडिग रहते हुए हवलदार गजेंद्र सिंह ने मौके पर ही वीरगति प्राप्त की और भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं, निस्वार्थ बलिदान और भाईचारे (कैमराडरी) की मिसाल पेश की।
आपको बता दें कि शहीद हवलदार गजेंद्र सिंह जनपद बागेश्वर के कपकोट तहसील के अंतर्गत आने वाला गाँव पोथिंग बीथी निवासी थे। वह 2nd बटालियन, पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल) में तैनात थे।
गजेन्द्र गढ़िया के पिता श्री धन सिंह गढ़िया जिन्होंने भारतीय सेना में अपनी अहम भूमिका निभाई है। माता श्रीमती चन्द्रा गढ़िया गृहणी हैं। गजेन्द्र साथियों की जान बचाने और व्यक्तिगत कीमत पर एक विदेशी आतंकवादी को पस्त करने के उनके असाधारण नेतृत्व और अदम्य साहस के लिए हवलदार गजेंद्र सिंह को 'कीर्ति चक्र' (मरणोपरांत) प्रदान किया गया है। उनका यह बलिदान देश हमेशा याद रखेगा।

