कपकोट महाविद्यालय में NCC कैडेट्स को कैप्टन उमेद सिंह गढ़िया ने दी देश सेवा की प्रेरणा
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| Captain Umed Singh Gariya |
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कपकोट में एनसीसी (NCC) कैडेट्स के लिए चल रही परेड और कक्षाओं के दौरान एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों में अनुशासन और देश प्रेम की भावना जगाना था। इस कार्यक्रम में भारतीय सेना की 16 कुमाऊं रेजिमेंट से सेवानिवृत्त कैप्टन उमेद सिंह गढ़िया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कैप्टन गढ़िया ने भारतीय सेना में बिताए अपने 28 वर्षों के लंबे अनुभव कैडेट्स के साथ साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे सेना में रहकर देश की रक्षा की जाती है।
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| Student and captain Umed Singh Gariya |
उन्होंने कैडेट्स को एनसीसी के महत्व, सेवा भाव, समर्पण और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमेशा सजग रहने की सलाह दी। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मधुलिका पाठक मौजूद रहीं। कार्यक्रम का संचालन और अतिथियों का स्वागत एनसीसी अधिकारी डॉ. मुन्ना जोशी ने किया। इस दौरान वरिष्ठ कैडेट पूजा गढ़िया, निरंजना दानू, रोहित आर्य और छात्र संघ अध्यक्ष मुकुल सिंह शाही सहित कई अन्य कैडेट्स भी उपस्थित रहे।
कैप्टन उमेद सिंह गढ़िया के बारे में जानें
Captain Umed Singh Gariya
मां भारती की सेवा में संलग्न रहे सेवा निवृत्त कैप्टन श्री उमेद सिंह गढ़िया के दादा जी 1929 से 1946 तक ब्रिटिश हुकूमत से 18 बर्ष तक लोहा लेने वाले स्व श्री राम सिंह गढ़िया जी की प्रेरणा से उनके सुपुत्र स्वर्गीय श्री जसौद सिह गढ़िया (कैप्टन गढ़िया के पिताजी) जिन्होंने स्वतंत्र भारत की सेवा व समृद्धि की इच्छा से 1961 से 1978 तक भारतीय सेना में सेवा दी मां भारती की सेवा में दादाजी व पिता जी की इच्छा जो रह गई उसे पूर्ण करने व सेवा की अलख निरन्तर जलती रहे। इस लक्ष्य को पूरा करने की इच्छा से कैप्टन श्री उमेद सिंह गढ़िया कुमांऊ रेजिमेंट में भर्ती हुए। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त कैप्टन श्री उमेद सिंह गढ़िया मूल रूप से ग्राम सभा पोथिंग कपकोट निवासी हैं। इनकी आरम्भिक शिक्षा राजकीय प्राथमिक विद्यालय पोथिंग से प्रारंभ कर इन्टर कालेज कपकोट तक का सफर तय करने पश्चात सन् 1993 में भारतीय सेना का अंग बने।
कैप्टन उमेद सिंह गढ़िया ने बताया की उन्होंने के आर सी रानीखेत से भारत माता की सेवा हेतु समर्पण किया। गहन प्रशिक्षण पश्चात बनबसा, अरुणाचल प्रदेश, सियाचिन ग्लेशियर, कानपुर, पंजाब, हिसार, मद्रास, मणिपुर, आसाम, सियाडांग, सिलिगुड़ी, सहित अनेक स्थानों पर 28 साल तक सेवा की सेवा निवृत्ति लेने से पूर्व ही देश सेवा समर्पण की एक मिसाल पुनः कायम करने की इच्छा स्वरूप पुत्र श्री नरेन्द्र सिंह गढ़िया को भी मां भारती की सेवा के लिए सन् 2020 मे भेज दिया। देश सेवा का जूनून हमारे सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगा सेना से सेवानिवृत्ति के पश्चात वर्तमान में भी आपके द्वारा युवाओं को सेवा भाव के प्रति जागरूक करने का प्रयास जारी है।


