संघर्ष से सफलता की नई कहानी: 3 साल की उम्र में उठा पिता का साया, रितिका पांडेय ने CSIR-NET JRF में हासिल की AIR-90
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| Ritika Pandey CSIR-NET JRF |
श्रीनगर गढ़वाल। कठिन परिस्थितियां रास्ता भले ही मुश्किल कर दें, लेकिन यदि इरादे मजबूत हों तो सफलता कदम चूमती ही है। इस बात को सच कर दिखाया है श्रीनगर गढ़वाल की बेटी रितिका पांडेय ने। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ जाने के बावजूद रितिका ने अपनी लगन और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा CSIR-NET JRF (असिस्टेंट प्रोफेसर) में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 90 हासिल कर पूरे उत्तराखंड का नाम रोशन किया है।
मां का त्याग और बेटी की लगन बनी मिसाल
रितिका जब महज तीन साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी माता मोनिका पांडेय ने एक अध्यापिका के रूप में परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए अपनी बेटी की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। मां के अटूट सहयोग और रितिका के अथक परिश्रम के बल पर ही आज उन्हें यह मुकाम हासिल हुआ है।
रितिका की प्रारंभिक शिक्षा श्रीनगर के 'सेंट थेरेसा स्कूल' से हुई। इसके बाद उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान (Botanical Science) में बीएससी और एमएससी की डिग्री प्राप्त की। CSIR-NET JRF से पहले रितिका प्रतिष्ठित GATE XL (Life Sciences) परीक्षा भी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर चुकी हैं।
अपनी इस उपलब्धि के बाद रितिका का अगला कदम वनस्पति विज्ञान और जैव विज्ञान (Sciences & Biotechnology) के क्षेत्र में पीएचडी (Ph.D.) पूरा करना है। वह अनुसंधान एवं शोध के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाना चाहती हैं।
रितिका की इस ऐतिहासिक सफलता पर पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों और गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें और उनकी मां को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।


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