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अभी अभी बड़ी खबर, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (रिटा.) का निधन, मैक्स अस्पताल में ली अंतिम सांस

अभी अभी बड़ी खबर, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (रिटा.) का निधन, मैक्स अस्पताल में ली अंतिम सांस


पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी

अभी अभी उत्तराखंड और देश की  राजनीति को स्तब्ध करने वाली खबर आई है। उत्तराखंड की राजनीति का अनुशासित चेहरा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (रिटा.) का निधन हो गया है। उन्होंने मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। भुवन चन्द्र खंडूडी उत्तराखंड की राजनीति के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने सैन्य अनुशासन, साफ-सुथरी छवि और प्रशासनिक सख्ती के दम पर अलग पहचान बनाई। सेना से राजनीति में आए खंडूरी ने न सिर्फ केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं, बल्कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी अपनी कार्यशैली की मजबूत छाप छोड़ी।

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में खंडूरी को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। उन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना और ‘गोल्डन क्वाड्रिलेटरल’ योजना को गति देने का श्रेय दिया जाता है। देश में सड़क नेटवर्क विस्तार के लिए उनके काम को काफी अहम माना गया। खंडूडी उत्तराखंड के दो बार मुख्यमंत्री रहे। पहला कार्यकाल 2007 से 2009 तक रहा। दूसरी बार 2011 से लेकर 2012 तक उन्होंने उत्तराखंड में राज किया। खंडूडी का जाना प्रदेश और भारतीय जनता पार्टी के लिए गम का विषय है।

 
वर्तमान मुख्यमन्त्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई bade दिग्गजों ने श्रधांजलि अर्पित की धामी ने कहा की उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआश्री खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत कियासैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहाराजनीतिक जीवन में उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाईएक जननेता के रूप में उन्होंने प्रदेश के विकास हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता से लोगों के हृदय में विशेष स्थान बनायाउनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति हैईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें


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