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Uttrakhand: भोपाल में डॉक्टरेट की मानद उपाधि के कार्यक्रम में उत्तराखंड के नैनीताल के पति पत्नी समेत 5 लोग हुए सम्मानित

डॉ राजेंद्र और डॉ उर्मिला

भोपाल में डॉक्टरेट की मानद उपाधि के कार्यक्रम में उत्तराखंड के नैनीताल के पति पत्नी समेत 5 लोग हुए सम्मानित

बीते बुधवार यानि कि 24 अप्रैल 2023 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्या पीठ मथुरा उत्तर प्रदेश के द्वारा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कराए गए राष्ट्रीय स्तर के "विद्या वाचस्पति सारस्वत सम्मान" की डॉक्टरेट की मानद उपाधि के कार्यक्रम में देश भर के विभिन्न राज्यों के 47 लोगों को डॉक्टर की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। जिसमें उत्तराखण्ड के सबसे अधिक  5 लोगों को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया, इसमें डॉक्टर परितोष मिश्रा (काशीपुर), ममता जोशी (देहरादून), साधना जोशी (उत्तरकाशी) हैं तथा नैनीताल से दो लोग राजेन्द्र प्रसाद आर्य और उनकी धर्मपत्नी उर्मिला रैसवाल को भी यह सम्मान प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, दोनों पति पत्नी अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, गुरु एवम् मित्रगणों को देते हैं।

उत्तराखंड के सम्मानित डॉक्टर


इस सम्मान समारोह में श्री देवेन्द्र कुमार जैन न्यायधीश मध्य प्रदेश सरकार, श्री विष्णुकांत कनकने प्रभारी मुख्यमंत्री उदयमान योजना तकनीकी शिक्षा मध्य प्रदेश, डॉo इंदु भूषण मिश्रा कुलपति पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्या पीठ, दीपा मिश्रा जी सुप्रसिद्ध कथा वाचक मथुरा, डॉo विश्वनाथ परिग्रही पर्यावरण विद् छत्तीसगढ़ आदि विशेषज्ञ शामिल हुए।

डॉक्टर उर्मिला रैसवाल ने बताया कि बचपन से ही उन्हें हिन्दी कविता लेखन में रुचि थी मगर वह डायरी तक ही सीमित रही। पति के द्वारा प्रोत्साहित करने पर उर्मिला जी ने ई-पत्रिका में अपने लेख प्रकाशित करने शुरू किये। सामाजिक कार्यों में रुचि होने के कारण उन्होंने अपनी शॉप "सिद्धिशा कलेक्शन" के नाम से महिलाओं और बच्चों के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए। भविष्य में भी वह इस कार्य को जारी रखेंगीं। अपनी इस उपलब्धि का श्रेय उर्मिला जी अपने माता-पिता, गुरु, भाई-बहन, मित्र और अपने पति को देती हैं।

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद आर्य ने बताया कि उन्होंने 13 वर्षों तक दूरस्त नेपाल से सटे हुए सीमांत गाँवों में कार्य करते समय ही बालिकाओं की शिक्षा पर कई कार्य किए। जिसके बाद वहाँ के अभिभावकों ने अपनी बालिकाओं को स्कूल भेजना जरूरी समझा और स्कूल में शिक्षा का स्तर बढ़ने लगा। अपनी इस उपलब्धि का श्रेय वह अपने माता पिता, गुरु, सभी मित्रगण और अपनी पत्नी को देते हैं। आगे भी वह इसी तरह कार्य करते रहेंगे ।

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