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Dehradun: दीपा नगरकोटी और कैलाश कुमार की आवाज में हुआ वीडियो गीत धुर छानी रिलीज, भवान और हिमांशु ने लगाये चार चांद

उत्तराखंड की वादियों में रचा-बसा नया कुमाऊँनी गीत 'धुर छानी' रिलीज, पारंपरिक संस्कृति की बिखरी छटा


वीडियो क्लिप bhawana, himanshu


​देहरादून। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और संगीत प्रेमियों के लिए एक और बेहतरीन सौगात सामने आई है। प्रदेश की लोकप्रिय गायिका दीपा नगरकोटी और जाने-माने लोक गायक कैलास कुमार का नया कुमाऊँनी गीत 'धुर छानी' (Dhur Chhani) आधिकारिक यू-ट्यूब चैनल UK Film Studio पर रिलीज हो चुका है। पारंपरिक धुनों और पहाड़ की संस्कृति से सराबोर इस गीत को रिलीज होते ही दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है।

गीत की वीडियो को उत्तराखंड की खूबसूरत पहाड़ की वादियों में पारंपरिक परिधानों के साथ फिल्माया गया है, जो दर्शकों को अपनी संस्कृति से जोड़ता है। वीडियो गीत में भावना कांडपाल और हिमांशु आर्या ने अपने बेहतरीन अभिनय से चार चांद लगा दिए हैं। टीजर आने के बाद से ही दर्शक इस फुल वीडियो का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। इस खूबसूरत गीत को पवन गुंसाई, राकेश भट्ट और सुभाष पांडे ने संगीत से सजाया है। इसका निर्देशन सोहन चौहान ने किया है, जबकि गीत के निर्माता मुकेश सती हैं।

​यह गीत पारंपरिक लोक कथाओं और पहाड़ी जीवनशैली पर आधारित है, जिसमें जीतू और धनुली के संवाद के माध्यम से प्रेम, प्रकृति, और पहाड़ के दैनिक जीवन (जैसे घास काटना और मवेशी चराना) को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया है।
"धूर छानी जांणयों जीतू जाणी रे यो घा काटण... खाली नि ठगै धनुली ऐ रूलों धूर जंगल..." के संवादों वाला यह गीत सावन-भादो के मौसम और पहाड़ी प्रेम को जीवंत कर देता है। ​पहाड़ के लोकगीतों के प्रति संगीत प्रेमियों और कलाकारों का लगातार बढ़ता रुझान इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रही है। अगर आपने अभी तक यह गीत नहीं देखा है, तो UK Film Studio यू-ट्यूब चैनल पर इसका आनंद जरूर लें।


धूर छानी ( Dhur Chhani ) Lyrics Kumaoni Song Kailash Kumar, Deepa Nagarkoti


फ़िमेल - धूर छानी जांणयों जीतू जाणी रे यो घा काटण,

गौर बाकुरियों दगड़ी वे आए में भेटण,

धूर छानी जांणयों जीतू जाणी रे यो घा काटण,

गौर बाकुरियों दगड़ी वे आए में भेटण,


मेल - खाली नि ठगै धनुली ऐ रूलों धूर जंगल,

जाणीरयों गौरू चारोंण बहाना लगूँलों घर,

खाली नि ठगै धनुली ऐ रूलों धूर जंगल,

जाणीरयों गौरू चारोंण बहाना लगूँलों घर !


फ़िमेल - लुए की पल्याई दाँतुली, हेरी हेरिया घा काटूँल 

तू सामणि बैठी रैये पूल मी आफ़ी बांधुल,

लुए की पल्याई दाँतुली, हेरी हेरिया घा काटूँल 

तू सामणि बैठी रैये पूल मी आफ़ी बांधुल,

लैणी छौ दुध्याई भैंसी…….

लैणी छौ दुध्याई भैंसी चुपैड़िया रवाट लैरुंल 

छवेई छिड़े को ठण्डों पाणि संग बैठी हेमी प्योंल !!

मेल - बौंट रूखों कू सैल बैठी त्यर लीजी मुरुली बजूँ 

मीठू तेरो बचन तू गीत ग़ैदे मी सूँणु 

बौंट जड़ों की छाया बैठी त्यर लीजी मुरुली बजूँ 

मीठू तेरो बचन तू गीत ग़ैदे मी सूँणु 

छोड़ी भेर दुनिया दारी त्यारा पछीले आयूँ 

गेदेतू गीत धनुली मुरुली धुन मी बजूँ !!

फ़ीमेल - सौंण भादो का दिन आई डान ढकिया होल में 

बुझण लागी धरती की तीस चौमास की बरखा में 

सौंण भादो का दिन आई डान ढकिया होल में 

बुझण लागी धरती की तीस चौमासे की बरखा में 

हाथ में हाथ 

हाथ में हाथ धरी भेरे माया का गीत लागुलों यें 

रम झम लागी बरखा मन भरी नाचूँला यें 

रम झम लागी बरखा मन भरी नाचूँला यें 

हाथ में हाथ धरी भेरे माया का गीत लागुलों यें 

रम झम लागी बरखा मन भरी नाचूँला यें 

रम झम लागी बरखा मन भरी नाचूँला यें


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