उत्तराखंड: चमोली के ग्वाड़ गांव की अनोखी पहल; 'पहले पिछले साल के पौधे दिखाओ, तब नए लगाओ' का नारा हुआ वायरल
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| चमोली |
उत्तराखंड के चमोली जिले में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल की शुरुआत हुई है। जिले के ग्वाड़ गांव में 'चरण पादुका गोथल समिति' ने इस वर्ष हरेला पर्व के अवसर पर प्रकृति संरक्षण का एक ऐसा संदेश दिया है, जो न केवल चर्चा का विषय बना है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी खूब सराहा जा रहा है।
"पौधे रोपना नहीं, संतान की तरह पालना जरूरी"
अक्सर वृक्षारोपण कार्यक्रमों में लोग पौधे लगाकर भूल जाते हैं, जिससे पौधों के जीवित रहने की दर बेहद कम रहती है। इस खोखली परंपरा को तोड़ने के लिए समिति ने एक बेहद मार्मिक और ठोस नारा दिया है: "पहले पिछले वर्ष के पौधे दिखाओ, तब इस वर्ष नए पौधे लगाओ।"
यह नारा न केवल समिति के जमीनी कार्य को दर्शाता है, बल्कि समाज को जिम्मेदारी का एहसास भी कराता है।
DFO ने की पहल की सराहना
इस पुनीत अभियान का शुभारंभ केदारनाथ वन प्रभाग के डीएफओ (DFO) श्री सर्वेश कुमार दुबे ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने समिति के इस दृष्टिकोण की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि, "पौधों को केवल रोपना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें एक संतान की तरह पालना और पोसना सबसे महत्वपूर्ण है। समिति का यह 'जवाबदेही' वाला मॉडल पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल है।"गांव के लोगों ने लिया संकल्प
इस गरिमामयी अवसर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए ग्रामीणों ने पुराने और नए, दोनों प्रकार के पौधों को जीवित रखने और उनकी सुरक्षा करने का अटूट संकल्प लिया।कार्यक्रम में इनकी रही विशेष उपस्थिति:
सुधीर तिवारी: संरक्षक एवं पर्यावरण प्रेमी
पुष्कर सिंह बिष्ट: अध्यक्ष, युवक मंगल दल
श्रीमती संतोषी कुंवर: अध्यक्ष, महिला मंगल दल
श्रीमती वंदना बिष्ट: वार्ड सदस्य
इसके अतिरिक्त श्री त्रिलोक सिंह बिष्ट और श्री मुकेश बिष्ट सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो छोटे स्तर पर भी बड़े और सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं। चमोली के ग्वाड़ गांव का यह प्रयोग अब अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।

