पद्म भूषण से सम्मानित पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का कपकोट में ऐतिहासिक स्वागत, उमड़ा जनसैलाब
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| सस्वागत करते हुए |
कपकोट (बागेश्वर)। भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘पद्म भूषण’ से अलंकृत होने के बाद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल आदरणीय श्री भगत सिंह कोश्यारी जी के प्रथम बार कपकोट आगमन पर विवेकानंद विद्या मंदिर में एक भव्य एवं भावविभोर कर देने वाले स्वागत एवं अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया।
यह अवसर केवल एक सम्मानित व्यक्तित्व के स्वागत का नहीं था, बल्कि उस महान तपस्वी कर्मयोगी के प्रति जन-जन की श्रद्धा, सम्मान और आत्मीय प्रेम की अभिव्यक्ति का प्रतीक बना, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज, प्रदेश और राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
गौरवपूर्ण अवसर पर शीर्ष जनप्रतिनिधियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस ऐतिहासिक समारोह में क्षेत्र के तमाम वरिष्ठ नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध जनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहने वाले गणमान्य व्यक्तियों में शामिल रहे:श्रीमती प्रभा गड़िया (भाजपा जिला अध्यक्ष)
श्रीमती गीता ऐठानी (नगर पंचायत अध्यक्ष)
श्रीमती भावना शाही (ब्लॉक प्रमुख)
श्री हरीश कोरंगा (मंडल अध्यक्ष)
श्री दयाल ऐठानी (निदेशक, कुमाऊँ मंडल विकास निगम)
श्री कुन्दन रेखोला (सदस्य, किसान आयोग)
श्रीमती चम्पा देवी (सदस्य, समाज कल्याण अनुश्रवण समिति)
श्री विक्रम शाही (पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष)
श्री ओम प्रकाश ऐठानी (कार्यक्रम संयोजक)
इसके साथ ही क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, पार्टी पदाधिकारियों एवं सैकड़ों कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की जीती-जागती मिसाल हैं कोश्यारी जी
वक्ताओं ने श्री भगत सिंह कोश्यारी जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन संघर्ष, त्याग, सेवा, राष्ट्रभक्ति और समर्पण की एक प्रेरणादायी गाथा है। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी योद्धा के रूप में उनकी भूमिका रही हो, या फिर मुख्यमंत्री, सांसद एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल जैसे सर्वोच्च संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन—उन्होंने सदैव जनसेवा को अपना धर्म और राष्ट्रहित को अपना सर्वोच्च लक्ष्य माना। उनकी सादगी, कर्मनिष्ठा, दूरदर्शी नेतृत्व एवं मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
"कोश्यारी जी का जीवन हम सभी के लिए एक मार्गदर्शिका की तरह है। उत्तराखंड की जनभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में उनका योगदान अतुलनीय है।"
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| भगत सिंह कोश्यारी जी का स्वागत करते हुए |


