मेहनत और नवाचार से बदली तकदीर: बागेश्वर के राजेंद्र सिंह कोरंगा बने युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
![]() |
| राजेंद्र कोरंगा |
पहाड़ के युवाओं के लिए पलायन के बीच, बागेश्वर जिले के शामा निवासी श्री राजेंद्र सिंह कोरंगा ने अपनी माटी में ही समृद्धि की एक नई इबारत लिख दी है। उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि अगर कड़ी मेहनत के साथ आधुनिक सोच और नवाचार (Innovation) को जोड़ दिया जाए, तो पारंपरिक खेती को भी एक मुनाफे वाले व्यवसाय में बदला जा सकता है।
पारंपरिक फसलों से लेकर कीवी उत्पादन तक का सफर
राजेंद्र सिंह जी ने अपने खेतों में केवल पारंपरिक खेती तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने अलग-अलग मौसमी सब्जियों और विभिन्न उन्नत फसलों का न केवल सफल उत्पादन किया, बल्कि क्षेत्र में कीवी की खेती को भी एक नई पहचान दी।
मूल्य संवर्धन (Value Addition) से बनाई अलग पहचान
अक्सर किसानों को फसलों का सही दाम न मिलने की शिकायत रहती है, लेकिन राजेंद्र सिंह जी ने इसका एक बेहतरीन समाधान निकाला। उन्होंने कीवी की फसल बेचने के साथ-साथ कीवी से बने विभिन्न बेहतरीन उत्पाद तैयार कर अपने व्यवसाय का विस्तार किया। स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादों का यह 'वैल्यू एडिशन' (मूल्य संवर्धन) आज के दौर में कृषि जगत के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन चुका है।
"खेती तभी सफल होती है, जब उसमें मेहनत के साथ नई सोच और नवाचार भी शामिल हो।"
— श्री राजेंद्र सिंह कोरंगा
पलायन रोकने और आत्मनिर्भरता का बड़ा संदेश
आज जहाँ पहाड़ का युवा रोजगार की तलाश में शहरों की ओर रुख कर रहा है, वहीं राजेंद्र सिंह जी का यह सफरनामा हर उस युवा के लिए एक सशक्त संदेश है जो अपने गांव में रहकर कुछ बड़ा करना चाहता है। उन्होंने साबित किया है कि आधुनिक कृषि, बागवानी और स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण (Processing) के माध्यम से गांव में रहकर भी न सिर्फ आत्मनिर्भर बना जा सकता है, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दिया जा सकता है।
क्षेत्र में सराहना
उनकी इस कर्मठता, दूरदर्शिता और लीक से हटकर काम करने के जज्बे के लिए उन्हें स्थानीय स्तर पर लगातार सराहना मिल रही है। लोग उन्हें एक 'प्रेरणादायक किसान' के रूप में देख रहे हैं। उम्मीद है कि उनकी यह सफलता घाटी के अन्य किसानों और युवाओं को आधुनिक खेती और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।

