लोहाघाट त्यारसौ के दो युवा किसानों ने रची सफलता की नई कहानी, 10 माह में शुरू किया रेशम कोकून उत्पादन
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| रेशम कोकून |
चम्पावत जिले की त्यारसौ ग्रामसभा के दो युवा किसानों ने मेहनत, लगन और नवाचार के बल पर रेशम उत्पादन के क्षेत्र में प्रेरणादायक मिसाल कायम की है। युवा किसान भीम कुमार और नीरज माहरा ने मात्र 10 माह के भीतर शहतूत आधारित रेशम कीटपालन में सफलता हासिल कर कोकून उत्पादन शुरू कर दिया है।
बाटुली एफपीओ से जुड़े दोनों किसानों ने रेशम विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए शहतूत के पौधों का रोपण किया और उनकी नियमित देखभाल करते हुए खेती में विशेष रुचि दिखाई। उनकी मेहनत और समर्पण को देखते हुए रेशम विभाग के अधिकारी विनोद ने उन्हें कोकून उत्पादन के लिए प्रेरित किया।
ट्रायल के रूप में शुरू किए गए इस प्रयास में दोनों किसानों ने केवल 20 दिनों के भीतर लगभग 12 किलोग्राम कोकून तैयार कर लिया। तैयार कोकून को विभाग द्वारा खरीद भी लिया गया, जिससे किसानों का उत्साह और बढ़ गया है।
रेशम विभाग के विनोद ने बताया कि रेशम कीटपालन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का एक मजबूत माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बाटुली एफपीओ के नरेंद्र सिंह माहरा ने बताया कि भीम कुमार और नीरज माहरा कृषि क्षेत्र में लगातार मेहनत कर रहे हैं। उनकी सफलता से क्षेत्र के अन्य किसान भी रेशम कीटपालन की ओर आकर्षित हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने शहतूत के पौधों का रोपण किया है, उन्हें भी जल्द प्रशिक्षण देकर इस कार्य से जोड़ा जाएगा। त्यारसौ के इन युवाओं की उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है तथा अन्य युवाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

