विकास कार्यों में न आए बाधा: जिलाधिकारी ने दिए वन भूमि हस्तांतरण के लंबित मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश
बागेश्वर। जनपद में विकास की रफ्तार को गति देने के लिए जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वन भूमि हस्तांतरण (Forest Land Transfer) की जटिलताओं के कारण सड़क, पेयजल और अन्य जनहितकारी योजनाएं लंबित नहीं रहनी चाहिए।
प्रमुख निर्देश: समन्वय और त्वरित निस्तारण जिलाधिकारी ने बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी से काम नहीं रुकना चाहिए। उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए: CA भूमि का संकट: जिन प्रस्तावों में क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां उपजिलाधिकारी (SDM) की अध्यक्षता में बैठक कर समाधान निकाला जाए।
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| Dm bageshwar |
विवादों का हल: सड़क अलाइनमेंट को लेकर होने वाले स्थानीय विवादों को सुलझाने के लिए प्रशासन स्थानीय लोगों के साथ संवाद स्थापित करेगा। नियमित फॉलो-अप: शासन, नोडल और भारत सरकार के स्तर पर लंबित प्रस्तावों के लिए विभागीय अधिकारी लगातार संपर्क बनाए रखें और उठाई गई आपत्तियों का तुरंत निराकरण करें। लीज नवीनीकरण: पेयजल निगम को पुरानी लीज के समयबद्ध नवीनीकरण और निरस्त परियोजनाओं की सीए भूमि को वापस करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। आंकड़ों की स्थिति: 44 प्रस्ताव प्रक्रियाधीन बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) आदित्य रत्ना ने जिले की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा पेश किया। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग (PWD), PMGSY और पेयजल निगम से संबंधित कुल 44 प्रस्ताव वर्तमान में विभिन्न चरणों में हैं स्तर लंबित प्रस्तावों की संख्या प्रस्तावक विभाग स्तर पर 33, नोडल स्तर पर 09, राज्य सरकार स्तर पर 02, कुल 44 "विकास योजनाओं का टेकओवर तभी किया जाए जब उसकी पूरी और सत्यापित जानकारी उपलब्ध हो। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वन संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बना रहे।" आकांक्षा कोंडे, जिलाधिकारी, बागेश्वर, जिलाधिकारी के इन सख्त निर्देशों से उम्मीद है कि जिले में लंबे समय से अटकी सड़क और पेयजल योजनाओं को जल्द ही हरी झंडी मिल सकेगी, जिससे स्थानीय जनता को सीधा लाभ पहुंचेगा।

