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55वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, पिथौरागढ़ द्वारा “व्हाइट वाटर रिवर राफ्टिंग अभियान (तरणी)–2026” का जौलजीबी में किया भव्य शुभारंभ

सीमांत क्षेत्रों में साहसिक खेलों को प्रोत्साहित करने तथा युवाओं में फिटनेस, अनुशासन एवं खेल भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सीमांत मुख्यालय सशस्त्र सीमा बल, रानीखेत के तत्वावधान में 55वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, पिथौरागढ़ द्वारा “व्हाइट वाटर रिवर राफ्टिंग अभियान (तरणी)–2026” का जौलजीबी में भव्य शुभारंभ किया गया। यह अभियान सीमांत क्षेत्रों में साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ जवानों की नदीय संचालन क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री आशीष कुमार भटगांई, जिलाधिकारी पिथौरागढ़ उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री अमित कुमार, महानिरीक्षक, सीमांत मुख्यालय सशस्त्र सीमा बल, रानीखेत द्वारा की गई। कार्यक्रम में श्री सुधांशु नौटियाल, उप महानिरीक्षक, क्षेत्रक मुख्यालय अल्मोड़ा सहित सेना, आईटीबीपी, सशस्त्र सीमा बल, पुलिस अधीक्षक श्री अक्षय कोंडे, स्थानीय प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा सीमांत क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने इस साहसिक अभियान की सराहना करते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

Pithoragarh


इस अभियान का नेतृत्व श्री सुधांशु नौटियाल, उप महानिरीक्षक द्वारा अभियान कमांडर के रूप में किया जा रहा है, जबकि श्री आशीष कुमार, कमांडेंट, 55वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल उप कमांडर के रूप में अभियान का संचालन कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में पूरी टीम अनुशासन, समन्वय एवं सुरक्षा के साथ इस चुनौतीपूर्ण अभियान को सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।अभियान में कुल 38 प्रतिभागी, 6 राफ्ट एवं 02 कायकिंग के माध्यम से भाग ले रहे हैं। प्रत्येक राफ्ट में मेसर्स विजय यात्रा, खटीमा द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रशिक्षित दल शामिल हैं, जिनमें अनुभवी राफ्टिंग प्रशिक्षक, सुरक्षा दल एवं सहायक कर्मी सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त SDRF एवं सशस्त्र सीमा बल की RRT टीम को चिन्हित स्थानों पर तैनात किया गया है। अभियान के दौरान सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है तथा आवश्यक सुरक्षा उपकरणों एवं प्रशिक्षित बचाव दल की व्यवस्था की गई है।


अभियान के दौरान 55वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल द्वारा स्थानीय जनता के लिए मानव चिकित्सा शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के गांवों के लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श एवं आवश्यक दवाइयाँ उपलब्ध कराई गईं। इस पहल का स्थानीय लोगों ने लाभ उठाया और बड़ी संख्या में ग्रामीण चिकित्सा शिविर में पहुंचे। अभियान का औपचारिक शुभारंभ प्रातः 9:30 बजे जौलजीबी मेला मैदान से किया गया, जहाँ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी आशीष भटगांई द्वारा हरी झंडी दिखाकर प्रतिभागियों को रवाना किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने प्रतिभागियों को सुरक्षित एवं सफल अभियान के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि इस प्रकार के साहसिक अभियान शारीरिक क्षमता के साथ-साथ टीमवर्क, नेतृत्व और आत्मविश्वास को भी सुदृढ़ करते हैं।


यह राफ्टिंग अभियान महाकाली (काली) नदी के जलमार्ग पर आयोजित किया जा रहा है, जो अपनी तीव्र जलधाराओं, चुनौतीपूर्ण प्रवाह तथा अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। यह नदी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ बहती है, जिसके कारण इसका सामरिक एवं भौगोलिक महत्व भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतिभागी दल जौलजीबी से 57वीं वाहिनी की सीमा चौकी बूम तक लगभग 150 किलोमीटर की नदी यात्रा चरणबद्ध रूप से पूर्ण करेगा। यह अभियान चार दिनों में पूर्ण किया जाएगा, जिसमें प्रथम दिन जुलाघाट, द्वितीय दिन पंचेश्वर तथा अंतिम चरण में 19 मार्च को बूम पहुंचा जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य दुर्गम नदीय सीमावर्ती क्षेत्रों में संचालन क्षमता को सुदृढ़ करना, तेज जलधाराओं में Swift Water Rescue क्षमता विकसित करना, संभावित आपदाओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना तथा विभिन्न फ्रंटियर एवं सेक्टरों के बीच समन्वय को बढ़ावा देना है। यह अभियान जवानों को कठिन परिस्थितियों में कार्य करने की मानसिक एवं शारीरिक तैयारी प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


अभियान की सफलता सुनिश्चित करने हेतु प्रतिभागियों को 09 मार्च से 14 मार्च 2026 तक गोरी नदी के जलमार्ग पर विशेष पूर्व-अभ्यास (Pre-Expedition Training) कराया गया, जिसमें राफ्ट संचालन, बचाव तकनीक, आपदा प्रबंधन एवं सुरक्षा उपायों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। यह अभियान भारत सरकार के “फिट इंडिया” तथा “खेलो इंडिया” जैसे राष्ट्रीय अभियानों की भावना के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है। सशस्त्र सीमा बल द्वारा आयोजित यह अभियान न केवल जवानों की नदीय संचालन क्षमता को सुदृढ़ करेगा, बल्कि सीमांत क्षेत्रों में साहसिक खेलों, पर्यटन तथा युवाओं के सकारात्मक सहभाग को भी बढ़ावा देगा। यह अभियान सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा, साहसिक खेलों और युवा सशक्तिकरण के समन्वित प्रयास का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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