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Kapkot News: कपकोट के बदियाकोट में भीषण अग्निकांड, सांस्कृतिक धरोहर आदिबद्री मां नंदा भगवती मंदिर क्षतिग्रस्त

​कपकोट के बदियाकोट में भीषण अग्निकांड, सांस्कृतिक धरोहर आदिबद्री मां नंदा भगवती मंदिर क्षतिग्रस्त

बदियाकोट मंदिर 



​बागेश्वर। कपकोट तहसील के मल्ला दानपुर क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध आदिबद्री मां नंदा भगवती मंदिर (बदियाकोट) में भीषण आग लग गई। नवरात्र के पवित्र पर्व के दौरान हुई इस दुखद घटना से मुख्य मंदिर भवन को भारी नुकसान पहुंचा है। घटना के बाद से ही चौदह पट्टी दानपुर क्षेत्र के ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों में गहरा शोक व्याप्त है। क्षेत्रवासी इसे केवल एक धार्मिक स्थल की क्षति नहीं, बल्कि गढ़वाल, कुमाऊं और तिब्बत की साझा सांस्कृतिक विरासत पर बड़ा आघात मान रहे हैं।

​धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र

​स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर सदियों पुराना है और दानपुर क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना का मुख्य आधार रहा है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशिष्टता यह है कि यहाँ मां भगवती के साथ-साथ तिब्बती हूण देवता तथा लाटू देवता की भी संयुक्त रूप से पूजा की जाती है। इसी कारण यह मंदिर कुमाऊं, गढ़वाल और तिब्बत की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के अनूठे संगम का प्रतीक माना जाता है।

​पारंपरिक नक्काशी और जन-आस्था

​मंदिर की भव्य लकड़ियों पर उकेरी गई पारंपरिक पहाड़ी नक्काशी इसकी खास पहचान थी। यह मंदिर सोराग, खाती, वाछम, तीख और डौला समेत चौदह पट्टियों के सैकड़ों गांवों की आस्था का मुख्य केंद्र है। इसके अलावा, हर आठ वर्ष में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध 'आठ्यौं जात' और हर चार वर्ष में आयोजित होने वाली 'घर-आठ्यौं' जैसी पौराणिक लोक परंपराओं में इस मंदिर की केंद्रीय भूमिका रहती है। अग्निकांड की सूचना मिलते ही प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मंदिर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित व संरक्षित करने की मांग की है।

​विधायक कपकोट का बयान: भव्य मंदिर का जल्द होगा पुनर्निर्माण

​कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया ने कहा कि"बदियाकोट मंदिर में आग लगने की घटना अत्यंत हृदयविदारक है। यह मंदिर पूरे क्षेत्र की जन-आस्था का मुख्य केंद्र है। श्रद्धालुओं की इस आस्था को किसी भी हाल में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। पूर्व की भांति भव्य मंदिर का निर्माण जल्द से जल्द कराया जाएगा और इसके लिए बजट या धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। साथ ही, आग लगने के कारणों की निष्पक्ष और गहन जांच के निर्देश प्रशासन को दे दिए गए हैं।"

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