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बागेश्वर तीन दिवसीय सरस मेले का हुआ समापन, सीडीओ नरेश कुमार ने ग्रामीण महिलाओं को बताया आत्मनिर्भरता की मिसाल

नुमाइशखेत मैदान में तीन दिवसीय सरस मेले का हुआ समापन, सीडीओ नरेश कुमार ने ग्रामीण महिलाओं को बताया आत्मनिर्भरता की मिसाल

सरस मेला बागेश्वर


​बागेश्वर नुमाइशखेत मैदान में तीन नवंबर से आयोजित तीन दिवसीय सरस मेले का बुधवार को भव्य समापन हो गया। इस समापन समारोह के मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) नरेश कुमार रहे।

​ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम

​समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य विकास अधिकारी नरेश कुमार ने कहा कि सरस मेला ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उनके उत्पादों को एक बड़ा बाजार उपलब्ध कराने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं को न केवल अपनी प्रतिभा और स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है, बल्कि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बनती हैं। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उनकी आजीविका के साधनों को मजबूत करना है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं आज स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके बेहतरीन और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर रही हैं। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाएं और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाते हुए 'लखपति दीदी' बनने के लक्ष्य को हासिल करें।

​35 स्टॉलों पर सजी स्थानीय कला और उत्पादों की झलक

​ग्राम्य विकास विभाग की ओर से आयोजित इस मेले में कुल 35 स्टॉल लगाए गए थे। इन स्टॉलों के माध्यम से ​उद्योग विभाग, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, ग्रामोत्थान, और मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के तहत स्टॉल सजाए गए। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया। ​मेले में स्थानीय उत्पादों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया।

​सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और बायर-सेलर मीट रही आकर्षण का केंद्र

​मेले के दौरान महिलाओं और प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने लोकगीत, लोकनृत्य, मेहंदी और एपण प्रतियोगिताओं जैसी सांस्कृतिक व खेल गतिविधियों में अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया। ​इसके अलावा, मेले में आयोजित बायर-सेलर मीट के माध्यम से महिला समूहों को संभावित खरीदारों से जोड़ा गया, जिससे उनके उत्पादों के विपणन (मार्केटिंग) और बिक्री के लिए नए रास्ते खुले हैं।

​सफलता के लिए जताया आभार

​मुख्य विकास अधिकारी ने मेले के सफल और भव्य आयोजन के लिए सभी संबंधित विभागों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और उनकी आजीविका को और अधिक सशक्त बनाने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।


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