यह उत्तराखंड के किसानों के लिए वाकई गर्व की बात है! दीपक सिंह गढ़िया जैसे प्रगतिशील किसान यह साबित कर रहे हैं कि अगर आधुनिक तकनीक और मेहनत का मेल हो, तो पहाड़ की खेती भी मुनाफे का सौदा बन सकती है।
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| सम्मानित पत्र के साथ दीपक |
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित राजभवन में आयोजित 'बसंत उत्सव' के मंच पर बागेश्वर जनपद के कपकोट का मान बढ़ा है। जनपद के ग्राम सभा पोथिंग निवासी प्रगतिशील किसान दीपक सिंह गढ़िया को कृषि के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदेश स्तरीय 'उत्कृष्ट कृषक' का प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। यह सम्मान उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह के हाथों प्राप्त हुआ।
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| फूलों की खेती |
पारंपरिक खेती से आधुनिक बदलाव तक का सफर
दीपक सिंह गढ़िया पिछले 7-8 वर्षों से खेती की पारंपरिक परिपाटी को बदलकर उसे आधुनिक और व्यावसायिक रूप देने में जुटे हैं। उन्होंने केवल अनाज तक सीमित न रहकर सब्जी, पुष्प, औषधीय पौधों और मशरूम उत्पादन को अपनाकर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।
प्रमुख उपलब्धियां और नवाचार:
पुष्प उत्पादन: कोविड काल जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उन्होंने 'एशियाटिक' और 'ओरिएंटल लिलियम' फूलों की खेती शुरू की। वर्तमान में वे जरबेरा की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं, जिसकी मांग हल्द्वानी और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों में है।
समीकृत कृषि (Integrated Farming):
सब्जी उत्पादन में वे टमाटर, ब्रोकली, शिमला मिर्च और मटर जैसी फसलों के साथ-साथ मशरूम उत्पादन भी कर रहे हैं।
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| दीपक गढ़िया मशरूम के साथ |
मूल्य संवर्धन (Value Addition):
उन्होंने मशरूम के साथ-साथ उससे अचार जैसे उत्पाद तैयार कर अपनी आय के स्रोतों को बढ़ाया है।
तकनीक और मार्गदर्शन का मेल
दीपक सिंह की इस सफलता के पीछे उद्यान विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए पॉलीहाउस और विभिन्न कृषि संस्थानों का तकनीकी मार्गदर्शन रहा है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए सम्मान की बात है, बल्कि पलायन की मार झेल रहे पहाड़ के अन्य युवाओं और किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। "दीपक सिंह गढ़िया की मेहनत यह दर्शाती है कि यदि सही तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जाए, तो उत्तराखंड की धरती सोना उगल सकती है।"



